Рассыпанные вопросы
فتاوى الإمام النووي المسماة: "بالمسائل المنثورة"
Издатель
دَارُ البشائرِ الإسلاميَّة للطبَاعَة وَالنشرَ والتوزيع
Номер издания
السَادسَة
Год публикации
١٤١٧ هـ - ١٩٩٦ م
Место издания
بَيروت - لبنان
Жанры
Фетвы
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Рассыпанные вопросы
Ан-Навави d. 676 AHفتاوى الإمام النووي المسماة: "بالمسائل المنثورة"
Издатель
دَارُ البشائرِ الإسلاميَّة للطبَاعَة وَالنشرَ والتوزيع
Номер издания
السَادسَة
Год публикации
١٤١٧ هـ - ١٩٩٦ م
Место издания
بَيروت - لبنان
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(١) هو المنع من تصرفات خاصة بأسباب خاصة. والحجر نوعان: ١ - نوع شرع لمصلحة المحجور عليه كالصبي، والمجنون، والسفيه، فإنه لحفظ مالهم. ٢ - ونوع شرع لمصلحة غيره كالحجر على المفلس فإنه لمصلحة الغرماء وهم أرباب الديون. اهـ. (٢) لأن الله تعالى لم يجعل للكافر على المؤمن سبيلًا لإهانته واستغلاله، فيؤمر العبد المسلم بالتكسب ليشتري نفسه فيعتقها مع كف يد الكافر عنه. اهـ. محمد.
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