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Методология ад-Дамири в его книге Хаят аль-Хайаван

منهج الدميري في كتابه حياة الحيوان

Номер издания

الأولى

Год публикации

١٤٣٥ هـ

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(١/ ٦٦٣) رواه مسلم، والترمذي.
(٢/ ٢٤٢) ذكر الحديث ثم قال: رواه الطحاوي، وغيره.
(٢/ ٣٨) ذكر الحديث ثم قال: رواه البخاري ومسلم من رواية عائشة، وحفصة، وابن عمر.
(٣/ ٣٦) ذكر الحديث ثم قال: رواه الطبراني، وابن أبي الدنيا.
(٣/ ٣٧٩) ذكر الحديث ثم قال: رواه أبو داود، والنسائي، والحاكم. (١)
* وأحيانًا يُقَسِّمُ التخريج، فيُورد بعضَه قبل الحديث، وبعضه بعده، وهذا غريبٌ منه ﵀، ومثاله:
(١/ ٨٩) عزا الحديث للبيهقي، ثم ذكر الحديث، ثم قال: وهو في ... «الكامل» لابن عدي.
(١/ ٣٩١) وفي «مسند» أبي يعلى الموصلي عن أنس ... وذكر الحديث ثم قال: ورواه أبو نعيم في ترجمة «الربيع بن صبيح».

(١) يُنظر أيضًا: (١/ ٤٢، ٣٩٠، ٥٧٢)، (٢/ ٢٥٢، ١٩٤، ٧٢، ٨٧، ١٢٤، ٦٠٢، ٧٠١، ٢٢٣).

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