मैंने अपना पूरा जीवन खड़े रहकर बिता दिया
أفنيت عمري واقفا
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मैंने अपना पूरा जीवन खड़े रहकर बिता दिया
मुहम्मद सालिम कबादा d. 1450 AHأفنيت عمري واقفا
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هل ننال الإذن والخلعة؟!
أخبرت رضوى، وأدراها
حدسها والصمت، و«براها»
حيرت روحين في الأسر!
السبت، 18 / 5 / 2013م
إلى «ماهي» التي لم أرها (من التهيؤ للوقوف)
ليت شعري يصادف الأذن منها
أو خيالي يزيح عنها النقابا
ويح قلبي! «ماهي» قد اعتصرته
إذ تساءلت نازعتني الجوابا
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