मैंने अपना पूरा जीवन खड़े रहकर बिता दिया
أفنيت عمري واقفا
शैलियों
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मैंने अपना पूरा जीवन खड़े रहकर बिता दिया
मुहम्मद सालिम कबादा d. 1450 AHأفنيت عمري واقفا
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هاك الملوخية الخضراء صنع يدي
يا رأسه يا خوانا فوقه مدا!
قد بعتني برخيص؟ لست تفجعني
سيجعل الله لي في المشترى ودا!
من لي بمن يضحك الباكين؟ يا وجعي
باب الرجاء وباب الصفو قد سدا
ولت كتاكيتك «البني» لا عوض
عنها وخر زمان دافئ هدا
والقلب فاجأنا بينا نلونه
بكسر فرشاتنا وابيض واسودا!
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